पेरिस ओलंपिक: अमन सेहरावत ने रचा इतिहास, भारत के सबसे कम उम्र के ओलंपिक पदक विजेता बने

Paris Olympics: Aman Sehrawat creates history, becomes India's youngest Olympic medalist
(Pic: Aman Sehrawat 🧢@AmanSehrawat57)

चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: शुक्रवार को पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत के युवा पहलवान अमन सेहरावत ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए कुश्ती का पहला पदक हासिल किया। छत्रसाल स्टेडियम के 21 वर्षीय पहलवान अमन ने कांस्य प्ले-ऑफ में प्यूर्टो रिकन पहलवान डेरियन टोई क्रूज़ को 13-5 से हराया। इस जीत के साथ, अमन ने भारत का पहला ओलंपिक कुश्ती पदक जीते और 21 साल, 0 महीने और 24 दिन की उम्र में भारत के सबसे कम उम्र के व्यक्तिगत ओलंपिक पदक विजेता बन गए।

अमन ने पीवी सिंधु का रिकॉर्ड तोड़ा, जो रियो ओलंपिक 2016 में रजत पदक जीतने के समय 21 साल, 1 महीने और 14 दिन की थीं। अमन ने अपने कांस्य पदक को अपने माता-पिता और देश को समर्पित किया, जिन्होंने उनके सपनों को समर्थन दिया। भावुक स्वर में उन्होंने कहा, “मेरे माता-पिता हमेशा चाहते थे कि मैं पहलवान बनूँ। उन्हें ओलंपिक के बारे में कुछ भी नहीं पता था, लेकिन वे चाहते थे कि मैं पहलवान बनूँ।”

11 साल की उम्र में अनाथ हो जाने के बाद अमन के जीवन में एक खालीपन था जिसे केवल कुश्ती के मैदान ने भर सकता था। उनके पिता ने 2013 में अमन को छत्रसाल स्टेडियम में दाखिला दिलाया था, जो अमन के जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। छत्रसाल स्टेडियम, जिसने पहले सुशील कुमार, योगेश्वर दत्त, बजरंग पुनिया और रवि दहिया जैसे चार ओलंपिक पदक विजेताओं को जन्म दिया है, अमन का दूसरा घर बन गया।

इन चैंपियनों के साथ प्रशिक्षण ने अमन पर स्थायी प्रभाव डाला। विशेष रूप से सुशील कुमार की कार्यशैली ने उन्हें प्रेरित किया। रवि दहिया के साथ उनका जुड़ाव भी मजबूत था, जो खुद भी युवा अवस्था में छत्रसाल आए थे और टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीत चुके हैं।

वर्ष 2022 अमन के करियर का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। किशोरावस्था में ही उन्होंने सीनियर सर्किट में सफलतापूर्वक प्रवेश किया और एशियाई अंडर-20 चैम्पियनशिप में कांस्य पदक और एशियाई अंडर-23 चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीते। सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में, उन्होंने विश्व अंडर-23 चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर अपने वरिष्ठ खिलाड़ियों बजरंग और रवि को भी पीछे छोड़ दिया।

पेरिस में अपनी यात्रा के दौरान, अमन ने प्यूर्टो रिकन पहलवान डेरियन टोई क्रूज़ को कांस्य पदक के प्ले-ऑफ में हराया, नाक से खून बहने के बावजूद उनके निरंतर हमले और रणनीतिक कौशल ने उन्हें ओलंपिक पोडियम पर सुनिश्चित किया। इस जीत के साथ भारत ने 2008 से हर ओलंपिक में कुश्ती पदक जीतने की परंपरा को बनाए रखा, जो सुशील कुमार ने शुरू की थी।

अमन का कांस्य पदक पेरिस खेलों में भारत का छठा पदक भी है, जिससे देश टोक्यो ओलंपिक में अपने सात पदकों के रिकॉर्ड की बराबरी के करीब पहुंच गया है। अमन सेहरावत की यह जीत न केवल उनके लिए बल्कि देश के लिए भी गर्व का पल है और युवा पहलवानों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन गई है।

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