प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस्कॉन मठ, पनवेल में स्वागत; धार्मिक एकता का संदेश
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गुरुवार को महाराष्ट्र के पनवेल स्थित इस्कॉन (इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कांशियसनेस) मठ में भव्य स्वागत किया गया। मठ के संन्यासियों ने प्रधानमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए “हरे राम, हरे कृष्णा” के जाप से वातावरण को भक्ति से अभिभूत कर दिया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने भी विशेष रूप से अपने हाथों में झंकार बजाई, जिससे इस पल को और भी आध्यात्मिक रूप से विशेष बना दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस्कॉन मठ में दर्शन किए और वहां मौजूद संन्यासियों से संक्षिप्त संवाद भी किया। इस घटना ने प्रधानमंत्री और इस्कॉन आंदोलन के बीच गहरे संबंधों को उजागर किया और आध्यात्मिकता तथा सांस्कृतिक धरोहर की महत्ता को रेखांकित किया।
प्रधानमंत्री मोदी का इस्कॉन समुदाय के प्रति यह कदम उनके स्नेह और उनके कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक माना गया। पनवेल में मठ में उनका यह दौरा, भारत सरकार की ओर से धार्मिक समुदायों के संरक्षण और उनके हितों की सुरक्षा के प्रति एक मजबूत संदेश के रूप में देखा गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का इस्कॉन मठ में समय बिताना केवल भारत के धार्मिक समुदायों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने का संकेत नहीं है, बल्कि यह भारत और विदेशों में इस्कॉन के अनुयायियों के साथ एकजुटता और समर्थन का भी स्पष्ट संदेश देता है।
यह घटनाक्रम विशेष रूप से महत्व रखता है, क्योंकि अगस्त महीने में बांग्लादेश के मेहेरपुर जिले में एक इस्कॉन मंदिर को नष्ट कर दिया गया था और उसे आग के हवाले कर दिया गया था। यह हमला बांग्लादेश में हुए हिंसक घटनाक्रम का हिस्सा था, जिसके कारण वहां हिंदू मंदिरों पर कई हमले हुए। इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए भारत सरकार ने बांग्लादेश सरकार से तत्काल सुरक्षा उपायों की अपील की थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने व्यक्तिगत रूप से इस स्थिति पर निगरानी रखी और बांग्लादेश सरकार से धार्मिक समुदायों, विशेष रूप से हिंदुओं, की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात की।
इस्कॉन मठ में प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा, न केवल भारत की धार्मिक स्वतंत्रता के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकता और धार्मिक सौहार्द का भी संदेश देता है।